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हर व्यक्ति को दूसरा मौका मिलना चाहिए

एक जनवरी को तुम अपने आप से कहते हो कि यह साल अलग होगा जबकि हर दिन उठने के बाद पीड़ा महसूस होती है. आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह कहता है कि परीक्षण करने पड़ेंगे. आप प्रतीक्षा करते हैं और फिर दस दिन बाद काम पर जाने से एक दिन पहले आप दोबारा यह सोचकर डॉक्टर के पास जाते हैं कि कहीं अगर कुछ निकल गया तो! परीक्षण के पांच मिनट के अंदर आपको सूचित किया जाता है कि आपको एक बड़ा ट्यूमर है! तब आप सचमुच दर जाते हैं….

जनवरी 2014 मेरे लिए इसी प्रकार शुरू हुआ. परिक्षण के एक सप्ताह बाद मेरे जन्मदिन पर मैं अस्पताल गया और एक बड़ा ऑपरेशन करवाया. अगले महीने जब बायोप्सी का परिणाम आया तो मुझे बताया गया कि मुझे तीसरी अवस्था का आंत का कैंसर था!  अगले छह महीने तक मेरी बारह बार कीमोथेरेपी हुई, जिसमें तीन दिन अस्पताल में बीतते थे, दस दिन उससे उबरने में और फिर वापस अस्पताल. उस दौरान मुझे अनुभव हुआ कि मैं कितना भाग्यशाली था, मुझे मेरी पत्नी, परिवार और दोस्तों का साथ प्राप्त था. इस बात को ध्यान मैं रखते हुए कि मैं अपने देश से 2200 किलोमीटर दूर यह सब झेल रहा था जहाँ क़ी भाषा भी मुझे नहीं आती थी, इस साथ का बहुत महत्व था.

इलाज के दौरान अप्रैल में मैंने लंदन मैराथन दौड़ देखी और निर्णय किया कि अगर मैं इस दौर से उबार गया तो अगले साल 26 अप्रैल 2015 को इस दौड़ में भाग लूँगा.  मुझे लगा कि सात साल से न दौड़ने की वजह से, स्वस्थ होने पर यह मेरे लिए एक चुनौती होगी! कीमोथेरेपी काफी कठिन होती है और इसलिए शुरू में यह सोच मेरे लिए सकारात्मक रहने का एक तरीका था. मैंने अपने दोस्तों से बात की और उन्होंने मुझे सकारात्मक सोचने के लिए प्रोत्साहित किया और यह भी कि ऐसा लक्ष्य कितना महान था! साथ मिलकर हमने इसे दानशील संस्थाओं जैसे की यूरोपाकोलोन, जो आंत के कैंसर से लड़ने में बहुत से लोगों की सहायता करती हैं, की मदद करने का एक तरीका बनाने की योजना शुरू की.

अगस्त के अंत में, कीमोथेरेपी के सफल परिणाम सामने आये जिससे कि सामान्य जीवन जीने कि शुरुआत हुई. सात महीने के बाद मैंने फिर से काम पर जाना शुरू किया. मैंने दौड़ना भी फिर से आरम्भ किया जिसका शुरू में मतलब था कि केवल पांच मिनट बहुत धीरे से दौड़ना (पैरों में ज़रा से एहसास के साथ) और धीरे-धीरे दूरी और गति को बढ़ाना! साथ ही साथ मैंने आंत के कैंसर से लड़ने में मदद करने वाली संस्थाओं के लिए चंदा इकठा करना भी शुरू किया ताकि ऐसे लोगों का सहारा बन सकूँ जो मेरे जितने भाग्यशाली नहीं हैं.

दिसंबर आते-आते मैं कई कल्याणकारी आयोजन कर चूका था जैसे कि मधुशाला रातें, प्रश्नोत्तरी रातें, पर्व रात्रिभोज और मनोरंजन से भरपूर रात्रिभोज आदि. उन आयोजनों से मैं आंत के कैंसर से लड़नेवाली दानी संस्थाओं के लिए कई हज़ार यूरो जमा कर चूका था. मैंने दौड़ना भी दोबारा आरम्भ कर दिया था, और (केवल) अक्टूबर में ही ल्युबलिआना में आधी मैराथन दौड़ने के बाद साल के अंत तक मैं 21 किलोमीटर की दूरी काफी बेहतर तरीके से पूरी करने में सक्षम हो चुका था. 2014 में 45 साल कि उम्र में दिमाग में अपने भविष्य के बारे में कई तरह के डर लिए, अपने जन्मदिन पर मैं अस्पताल में एक बड़े ऑपरेशन कि तैयारी कर रहा था! एक साल के बाद मैंने निकट भविष्य में होनेवाली लन्दन मैराथन दौड़ की तैयारी में 15 किलोमीटर की अभ्यास दौड़ में हिस्सा लिया.

ज़िन्दगी हमेश आसान नहीं होती, जीवन के किसी भी पल में हमारा सामना ऐसी कठिन परिस्थितियों से हो सकता है जब रास्ता चुनना मुश्किल हो जाता है! इसलिए अपने अंदर से और परिवार और दोस्तों की मदद से सकारात्मक रहना हम सबके लिए बहुत ज़रूरी है. यूरोपाकोलोन एक ऐसी दानशील संस्था है जो आंत के कैंसर से पीड़ित लोगों को दूसरा मौका देने में और सकारात्मक रहने में सहायता करने की कोशिश करती है.